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Friday, 27 January 2017

स्काउट-गाइड शिविर में दिखी अनेक राज्यों की छटा

वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के परिसर में विभिन्न राज्यों की छटा निराली थी। 11 राज्यों का खान-पान, पहनावा, रहन-सहन को दर्शाते नजारे पूरे भारत की संस्कृति और सभ्यता के संकेत दे रहे थे। मेवाड़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के 170 विद्यार्थियों ने स्काउट एंड गाइड शिविर में टैंट बांधने की कला के दौरान इन सब नजारों को बखूबी प्रदर्शित किया। इस मौके पर जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के प्राचार्य श्री दिनेश सिंह बतौर मुख्य अतिथि पधारे। उन्होंने अपने सम्बोधन में सभी विद्यार्थियों को देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी की जानकारी दी और उम्मीद जताई कि वक्त आने पर वे देश सेवा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने से पीछे नहीं हटेंगे।
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया, निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल व विधि विभाग के महानिदेशक भारत भूषण ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किये टैंटों का निरीक्षण किया। टैंटों की सुंदरता, टैंट बांधने की कला, उनकी मजबूती व प्रस्तुतिकरण पर विशेष अंक प्रदान किये गये। चार दिन चले इस स्काउट-गाइड शिविर एनसीसी के जिला स्काउट संगठन आयुक्त की निगरानी में आयोजित किया गया। 

मेवाड़ में मची देशभक्ति गीतों व नृत्यों की धूम

- 68वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया
- चेयरमैन डॉ अशोक कुमार गदिया ने झंडारोहण कर कृतज्ञ राष्ट्र को किया नमन

 ‘सारे जहां से अच्छा, हिन्दुस्तां हमारा’ थीम को लेकर वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूषंस ऑडिटोरियम में 68वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। नाटक, सम्भाषण, कविताओं व देशभक्ति गीतों पर नृत्य प्रस्तुति के जरिये अपने गणतंत्र को कृतज्ञ भाव से याद किया गया। 
 
गणतंत्र दिवस की सुबह मेवाड़ इंस्टीट्यूषंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने इंस्टीट्यूशंस परिसर में तिरंगा फहराया। मेवाड़ परिवार ने राष्ट्रगान गाकर अपनी भावांजलि देष को समर्पित की। मेवाड़ ऑडिटोरियम में चेयरमैन डॉ. गदिया ने कहा कि पिछले 68 वर्षों में हमारे देष ने खूब तरक्की की है। दो-तीन बड़े देषों को छोड़कर हमारी किसी और देष से तुलना नहीं होती। हम अतुलनीय हैं। हमारा देष वंदनीय है। 130 करोड़ की आबादी, विभिन्न संस्कृति, विभिन्न बोलियां, अलग रहन-सहन, खान-पान होने के बावजूद हमारा देष एक है। और यह हमारे मजबूत गणतंत्र की अमर पहचान है। इससे पूर्व बीएड विभाग के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना व वंदेमातरम से समारोह की विधिवत शुरुआत की। छात्रा सोनम ने अपने सम्भाषण में गणतंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। वंदना चौबे व विदित ने एकल गायन, ज्योति के नृत्य ने देशभक्ति के वातावरण को नई ऊर्जा दी। समारोह की सबसे आकर्षक प्रस्तुति थी विभिन्न राज्यों के पारम्परिक नृत्य। अंत में मेवाड़ इंस्टीट्यूषंस की निदेषिका डॉ. अलका अग्रवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि मेवाड़ देषभक्ति के कार्यक्रमों के जरिये पूरे एनसीआर में धूम मचाये हुए है। इस मौके पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेषक भारत भूषण समेत पूरा मेवाड़ परिवार मौजूद था। संचालन शिक्षा विभाग की छात्राओं सोनम सिंह, हेमंत कुमार व सौम्या श्रीवास्तव ने किया।  

Friday, 20 January 2017

मेवाड़ में ‘मतदान के फायदे’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित

मताधिकार जिम्मेदार नागरिक होने का अहसास है-जिलाधिकारी निधि केसरवानी
इस बार हम लोकतंत्र के एक्टीविस्ट बनें- डॉ. गदिया
 जिलाधिकारी निधि केसरवानी ने कहा कि मताधिकार जिम्मेदार नागरिक होने का अहसास है। सीमा पर लड़ना ही देशप्रेम नहीं होता। देश के अंदर फैली बुराइयों से लड़ना भी देशप्रेम कहलाता है। वोट देना भी देशप्रेम का प्रतीक है। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के ऑडिटोरियम में आयोजित मासिक विचार संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता निधि केसरवानी ने यह बात कही। वह ‘मतदान के फायदे’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहीं थीं।
विद्यार्थियों व शिक्षकों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में निधि केसरवानी ने कहा कि गाजियाबाद जिला पूरे प्रदेश में राजस्व देने में नंबर एक पर है। हर क्षेत्र में इस जिले ने अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। लेकिन वोट देने में 25.92 लाख मतदाताओं से अटा यह जिला बहुत पिछड़ा हुआ है। देहात क्षेत्र में मात्र 70 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 40 प्रतिशत वोट पड़ता है। इस बार इसे 75 प्रतिशत तक लेकर जाना होगा, तभी सही प्रतिनिधि का चुनाव संभव है। उन्होंने कहा कि हमारे छोटे-छोटे प्रयासों से ही समाज में बदलाव लाया जा सकता है। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि अधिक मत प्रतिशत से ही देश में बदलाव संभव है। हम इस बार लोकतंत्र के एक्टीविस्ट बनें। हम मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र की ताकत दिखा सकते हैं। हम मालिक को सेवक की भूमिका में लाने का अधिकार अपने पास रखते हैं। मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने निधि केसरवानी का परिचय पढ़ने के साथ ही बताया कि मतदाता जागरूकता अभियान के तहत मेवाड़ पांच प्रकार के कार्यक्रम कर रहा है। विचार संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक, मतदाता जागरूकता शिविर, शपथ ग्रहण समारोह व जागरूकता रैली। रैली में मेवाड़ के बच्चे वसुंधरा क्षेत्र के लोगों को वोट देने के लिए जागरूक करने का काम करेंगे।

इससे पूर्व डॉ. गदिया व डॉ. अलका ने जिलाधिकारी निधि केसरवानी को गुलदस्ता, स्मृति चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया। संगोष्ठी का सफल संचालन कवि व पत्रकार चेतन आनंद ने किया।

Tuesday, 17 January 2017

फिल्मी सितारों को आदर्श न मानें युवा- डॉ. गदिया

मेवाड़ में स्वामी विवेकानंद जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों ने सबका मन मोहा
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में स्वामी विवेकानंद जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों ने सबका मन मोह लिया। सम्भाषण और कविताओं ने तो सराहना बटोरी ही, स्वामी विवेकानंद पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने माहौल में चार चांद लगा दिये। इस मौके पर इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने स्वामी विवेकानंद को भारत के 65 करोड़ युवाओं का सशक्त प्रतिनिधि बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के मद्रास में ’मेरी क्रांतिकारी योजना’ विषय पर दिये गये भाषण को एक बार जरूर पढ़ें। 

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा व ज्ञान की कमी का ही परिणाम है कि भारत के युवा फिल्मी सितारों को अपना आदर्श बनाये बैठे हैं। जबकि महापुरुषों के चरित्र को अपनाकर ही भारत में विकास की संभावनाओं को जन्म दिया जा सकता है। उन्होंने अपने सम्भाषण में दया, करूणा व गुरु की महिमा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्रकृति अनुसार ही देश के विकास की योजनाओं का खाका तैयार करना होगा, अन्यथा हर सरकारी योजना कागजों में ही आकर्षक दिखाई देगी। विवेकानंद जयंती समारोह में प्रस्तुत नाटक की शुरुआत रामकृष्ण परमहंस व विवेकानंद संवाद से होती है और दिखाया जाता है कि कैसे नरेन्द्र नामक एक साधारण युवक स्वामी विवेकानंद बनकर विश्व में अपनी कीर्ति पताका फहराता है। बीएड व बीटीसी के विद्यार्थियों ने अपने प्रभावी अभिनय से नाटक को सजीव बनाया और दर्शकों की तालियां बटोरीं। इसके अलावा विद्यार्थियों द्वारा गाया गया वंदेमातरम्, पूनम त्रिपाठी व इंदिरा का सम्भाषण, स्वामी विवेकानंद व उनके गुरु के मध्य हुआ संवाद का चित्रण, भजन, कविता, गीत आदि बहुत सराहे गये। समारोह में इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल, विधि विभाग के महानिदेशक भारत भूषण आदि मौजूद थे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई। संचालन पूजा गुप्ता एवं प्रत्यूषा ने किया।

Thursday, 5 January 2017

मेवाड़ इंस्टीट्यूट में गुरु गोविन्द सिंह जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई

महापुरुषों के आदर्श अपनाये बिना देश नहीं बनेगा महान- डॉ. गदिया
विद्यार्थियों ने शबद-कीर्तन, कविताओं व सम्भाषण के जरिये गुरु गोविन्द सिंह को किया याद

 मात्र जयंतियां मना लेने भर से देश महान नहीं बनने वाला, जयंतियों से लोग जागरूक हों, सकारात्मक सोच के साथ महापुरुषों के आदर्शों को अपनाकर आगे बढ़ें, देश तब महान बनेगा। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने विवेकानंद सभागार में आयोजित 350वें गुरु गोविन्द सिंह जयंती समारोह में ये विचार व्यक्त किए। 
विद्यार्थियों व मेवाड़ स्टाफ से खचाखच भरे विवेकानंद सभागार में उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में गुरु गोविन्द सिंह जैसा महान बलिदानी पैदा नहीं हुआ। देश के लिए उन्होंने अपने पिता व बच्चों का बलिदान तक कर दिया। वह अन्याय के प्रति संघर्ष करते रहे मगर अपनी कौम की आन, बान और शान को नहीं छोड़ा। वह परिवार बलिदान हो जाने के बावजूद टूटा नहीं, बल्कि दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया। उनका संघर्ष किसी एक समुदाय विशेष के साथ नहीं बल्कि अत्याचारियों के खिलाफ था। डॉ. गदिया ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह समाज प्रवर्तक थे। सभी जातियों को एक सूत्र में पिरोकर उन्होंने खालसा पंथ बनाया। उनका मानना था कि हर परिवार का एक सदस्य सिक्ख जरूर बने। लेकिन उनकी यह परम्परा आगे तक न चल सकी। अगर उनकी सोच को हम लोग बल देते तो देश का नक्शा आज विश्व में अनूठा होता। 
समारोह में निकिता, निरूपमा, हरमीत कौर, सौम्या, शिवानी आदि विद्यार्थियों ने शबद-कीर्तन, कविताएं व गटका मार्शल आर्ट के जरिये गुरु गोविन्द सिंह के आदर्शों व जीवन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल, विधि विभाग के महानिदेशक भारत भूषण भी मौजूद थे। समारोह का सफल संचालन शिवानी अरोड़ा ने किया। 

Sunday, 25 December 2016

मेवाड़ में ‘नोटबंदी’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित

राजनीतिक सिस्टम दुरुस्त होता तो न होती नोटबंदी-रवि कुमार
- कैशलेस सिस्टम के भविष्य में निकलेंगे सुखद परिणाम- डॉ. गदिया
- प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने दूर की शंकाएं
 ‘हमारे देश में राजनीतिक सिस्टम अगर ठीक होता तो नोटबंदी की ज़रूरत ही न पड़ती।’ सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट रवि कुमार ने वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में आयोजित मासिक विचार संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता यह बात कही। वह ‘नोटबंदी’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि देश में केवल एक प्रतिशत लोग ही सरकार को टैक्स अदा कर रहे हैं। कैशलेस सिस्टम लागू होने से टैक्स ज्यादा आएगा। इससे देश के हालात सुधरेंगे। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि देश में 50 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं। अधिकांश हिस्सों में बिजली व्यवस्था ठीक नहीं है। ज्यादातर बैंकों के सरवर भी डाउन रहते हैं। दो तिहाई बैंक शहरों में हैं। दो लाख 15 हजार एटीएम में से 90 प्रतिशत लोकल शहरों में हैं। गांवों तक कैशलेस सिस्टम का लाभ कैसे मिलेगा, यह चिंतनीय विषय है। उन्होंने कैशलेस सिस्टम दुरुस्त करने से पहले साइबर कानून को और सख्त करने की बात पर बल दिया।

मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि नोटबंदी करना बहुत अच्छी शुरुआत है। हमारा देश नई दुनिया और नये बदलाव की ओर पहला कदम बढ़ा चुका है। इससे भ्रष्टाचार पर नकेल कसेगी तो भ्रष्ट राजनीतिक सिस्टम भी ठीक होगा। हालांकि अभी नोटबंदी के दुष्परिणाम हमें नजर आ रहे हैं लेकिन भविष्य में इसके सुखद नतीजे देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में मुख्य अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एक समानान्तर अर्थव्यवस्था भी चलती है। लोग इसे बचत का नाम देते हैं। हमारी बचत करने की प्रवृत्ति ने ही हमें हर संकट से बचाया है। कहना गलत न होगा कि विपदा में भारतीय समाज ने ही सरकारें बचाई हैं। मोदी सरकार का यह नया फैसला इस समानान्तर अर्थव्यवस्था को भी बचाएगा, यह भविष्य बताएगा। विचार संगोष्ठी में मुख्य वक्ता रवि कुमार को मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की ओर से शॉल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल, मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण, गंगा सागर सिंह, प्रसिद्ध लेखिका नंदिता झा आदि मौजूद थे। विचार संगोष्ठी का सफल संचालन डॉ. श्रीमती राजेश सिंह ने किया।

Friday, 2 December 2016

मेवाड़ में ‘विमुद्रीकरण का अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित

नोटबंदी पर सरकार की नीयत सही, तैयारी अधूरी- हरवीर
- समानान्तर अर्थव्यवस्था ने हमें हर संकट से उबारा- डॉ. गदिया
- अन्य वक्ताओं ने भी विचार किये व्यक्त, कहा- नोटबंदी देशहित में सही

 नोटबंदी का निर्णय लेकर सरकार ने उचित किया है। नई अर्थव्यवस्था लागू करने के पीछे सरकार की नीयत भी साफ है। लेकिन फैसला लागू करने में उसने जल्दबाज़ी दिखाई। इस कारण सरकार की तैयारियां अधूरी रहीं। इसका अगले 4-5 सालों में देश की जीडीपी पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में आयोजित मासिक विचार संगोष्ठी में प्रख्यात पत्रकार हरवीर सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता यह बात कही। वह ‘विमुद्रीकरण का अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी के फैसले का दूरगामी बहुत लाभ मिलेगा। लोगों की सोच में बदलाव आएगा। नई अर्थव्यवस्था बनाने में काफी सहूलियत रहेगी। देश की जीडीपी तय करने में आसानी रहेगी। बैंक कर्ज़ा ज्यादा देंगे। ब्याज दर कम होगी। गाड़ी, जेवर, मकान सस्ते मिलेंगे। उद्योग-व्यापार में ज़्यादा निवेश का मौका मिलेगा। नये रोज़गार सृजित होंगे व देश में नई तकनीक आएगी। करों का दायरा बढ़ेगा। ईमानदार करदाताओं का भार कम होने के आसार हैं। लेकिन कैशलेस व्यवस्था देश में पूरी तरह लागू हो पाएगी, यह कहना मुश्किल है। इसे हम कैशलेस नहीं लेसकैश व्यवस्था कह सकते हैं। अभी तो देश की हालत पतली है। लोग कतार में लगे हैं। असंगठित क्षेत्र के कारोबार की कमर टूट चुकी है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर, कपड़ा उद्योग व ऑटोमोबाइल सेक्टर चरमरा गये हैं। मंडियों का बुरा हाल है। टू व्हीलर बिकने बंद हो गए हैं। आटोमोबाइल इंडस्ट्री ने तो अपना सेल एस्टीमेट घटा दिया है। इसका जीडीपी पर अगले 4-5 सालों में विपरीत असर साफ दिखाई देगा। जीडीपी दर में काफी गिरावट आने की उम्मीद है। रबी की फसल बोने के लिए किसानों के पास फिलहाल बीज व खाद नहीं है। किसानों को पैसा नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार की तैयारी अधूरी थी तो नोटबंदी का फैसला जनवरी महीने में लिया जा सकता था। सरकार नोटबंदी के बाद बार-बार अपनी घोषणाओं में संशोधन करने में लगी है। उन्होंने कहा कि लोगों को शिक्षित करने की जरूरत थी लेकिन सरकार ने अर्थव्यवस्था रूपी रेसिंग कार के टायर में अचानक गोली मारकर विश्व में छठे पायदान पर खड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था को औंधे मुंह गिरा दिया है। सरकार को अभी अपने प्रयासों में और तेजी लानी होगी। 
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि विश्व के कई देशों पर बड़े से बड़ा संकट जब आया तो भारत ने मदद की। भारत की अर्थव्यवस्था कभी नहीं डगमगाई। इसका कारण यह था कि भारत में मुख्य अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एक समानान्तर अर्थव्यवस्था भी चलती है। लोग इसे बचत का नाम देते हैं। हमारी बचत करने की प्रवृत्ति ने ही हमें हर संकट से बचाया है। कहना गलत न होगा कि विपदा में भारतीय समाज ने ही सरकारें बचाई हैं। मोदी सरकार का यह नया फैसला इस समानान्तर अर्थव्यवस्था को भी बचाएगा, यह भविष्य बताएगा। 
विचार संगोष्ठी में मुख्य वक्ता हरवीर सिंह को मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की ओर से शॉल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के अपर महानिदेशक एके गौतम, समाजिक चिंतक सत्यदेव राय, डॉ. बीएल गौड़, गंगा सागर सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल, डॉ. एसके गिलरा समेत मेवाड़ परिवार के समस्त सदस्य व विद्यार्थी मौजूद थे। विचार संगोष्ठी का मनमोहक संचालन प्रो. आईएम पांडेय ने किया। 

मेवाड़ में संविधान दिवस समारोहपूर्वक आयोजित

सभी न्यायाधीश अपनी सीमा न लांघें- संगल
सफल वकील बनने के बाद करना गरीब वादकारियों की मदद 
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के दयानंद सभागार में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित संविधान दिवस समारोह में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश योगेन्द्र कुमार संगल ने केन्द्रीय वित मंत्री अरुण जेटली की बात को बढ़ाते हुए आग्रह किया कि सभी न्यायाधीश अपनी सीमा को पार न करते हुए काम करें। जब भी कार्यपालिका जनता के अधिकारों का उल्लंघन करती है, तभी ये मामले न्यायपालिका तक पहुंचते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम कर श्रेष्ठ वकील बनने की नसीहत दी। 
अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह किसी की सज़ा में संशोधन कर सकते हैं लेकिन अफसोस यह काम अब अदालतें अपने बूते करने लगी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सीमा से बाहर आकर कई मामलों में न्याय देने का काम किया है। इसे ज्यूडिशियल एक्टीविज्म कहते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी मन लगाकर कठिन परिश्रम करें। आगे बढ़ें। भगवान आपके साथ है। सफलता जरूर मिलेगी। 
समारोह में कानून की पढ़ाई कर रहे वकार, राहुल सहगल, रेनू, आरुषि, रूबी, पूजा गर्ग आदि ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त कर सबका मन मोहा। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने मुख्य अतिथि योगेन्द्र कुमार संगल को स्मृति चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया। अंत में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के अपर महानिदेशक एके गौतम ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थी समय-समय पर मुफ्त कानूनी शिविर का आयोजन करते हैं। तिहाड़ जेल में बराबर शिविर लगाकर कैदियों को न्याय दिलाने की मुहिम चलायी जा रही है। संचालन गुरुमहिमा ने किया। इस अवसर पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण समेत लॉ इंस्टीट्यूट का शिक्षण स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद थे। 

Friday, 25 November 2016

दुनियाँ बदलने से पहले खुद को बदलें- डॉ. गदिया

मेवाड़ में गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस मनाया
विद्यार्थियों ने सम्भाषण, कविता, शबद-कीर्तन के जरिये किया गुरु तेग बहादुर को याद

 हम दुनिया बदलने से पहले खुद को बदलें। पहले स्वयं पर शासन, फिर अनुशासन। तभी दुनिया बदलने की ताकत हममें आएगी। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने विवेकानंद सभागार में आयोजित गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस समारोह में बतौर अध्यक्ष यह बात कही।
उन्होंने गुरु तेग बहादुर के जीवन के अनेक प्रेरणाप्रद संदर्भ सुनाने के बाद कहा कि गुरु तेग बहादुर केवल सिक्खों के गुरु नहीं थे, बल्कि अशक्त, लाचार, मुगलों के अत्याचारों से पीड़ित व सुविधाओं से वंचित समाज के अग्रदूत थे। धर्म की रक्षार्थ उन्होंने अपने तीन साथियों के साथ शहीद होना कबूल किया। उन्होंने जिस काम को हाथ में लिया उसे नतीजे तक पहुंचाया। गुरु तेग बहादुर सिखाते हैं कि किसी को मानना, उसका नाम जपना अलग बात होती है और किसी के बताये मार्ग पर चलकर कुर्बानी देना अलग जज्बा होता है। 
शहीदी दिवस के मौके पर मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के छात्रों दिव्या धवन, त्रिशा राना, अंकुश कुमार, विनय, निरूपमा मिश्रा, आरती शुक्ता, पूजा रानी आदि ने सम्भाषण, कविता व शबद-कीर्तन के जरिये गुरु तेग बहादुर को याद किया। इस मौके पर मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल, विधि विभाग के महानिदेशक भारत भूषण समेत तमाम स्टाफ व विद्यार्थी भारी संख्या में मौजूद थे। संचालन प्रोफेसर हरमीत कौर व बीटीसी की छात्रा सौम्या श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से किया। 

Thursday, 24 November 2016

मेवाड़ में रानी लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी एवं गुरुनानक देव जयंती एकसाथ मनाई गईं

महिलाएं अपनी शक्ति पहचानें- डॉ. गदिया
रंगारंग कार्यक्रमों से विद्यार्थियों ने सबका मन मोहा
 वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के मेवाड़ ऑडिटोरियम में पहली बार रानी लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी व गुरुनानक देव जयंती एकसाथ मनाई गईं। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने दोनों वीरांगनाओं व गुरुनानक देव पर आधारित रंगारंग व भक्तिमय कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज देश पर सबसे बड़ा आतंकी खतरा मंडरा रहा है। हमारी सरहदें आतंकी संकट की चपेट में हैं। करोड़ों-अरबों रुपया बहाकर भी हम आज सुरक्षित नहीं हैं। हमें आज जागरूक होना होगा। रानी लक्ष्मी बाई व इंदिरा गांधी जैसा देश के लिए बलिदान देने का जज्बा मन में पैदा करना होगा। डॉ. गदिया ने कहा कि महिलाएं रानी लक्ष्मी बाई व इंदिरा गांधी के बलिदान से सबक लें। वे मानसिक रूप के अलावा शारीरिक रूप से सबल बनें। शिक्षक छात्राओं में शिक्षा व ज्ञान के अलावा उनमें हिम्मत व साहस का संचार भी करें। उन्होंने कहा कि संसार में दो ही महापुरुष ऐसे हुए, जिन्होंने कुरआन व हिन्दू धर्म के अच्छे तत्वों को लेकर सामान्य जीवन पद्धति का निर्माण किया। मगर धर्म के ठेकेदारों ने इस पद्धति को कायम नहीं होने दिया। अगर यह जीवन पद्धति कायम हो जाती तो हिन्दू-मुस्लिम एक होते। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि गुरु नानकदेव का जन्म ऐसे समय में हुआ, जब विदेशी आक्रांताओं का भारत में राज था। धर्म के ठेकेदारों का बोलबाला था और जाति अपने मूलमंत्र से दूर हो रही थी। ऐसे में गुरुनानक देव ने प्रकाश के रूप में प्रकट होकर जगत में व्याप्त अंधियारा दूर करने का काम किया। गुरु नानक ऐसे पहले संत थे जिन्होंने जनता के बीच रहकर जनता की भाषा में अपनी बात कही। एक नई दिशा दी और ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि आज भी गुरुनानक देव के उपदेश प्रासंगिक हैं। वे महज संत ही नहीं विश्व गुरु हैं। उन्होंने समाज के हर तबके को मानवता के साथ जोड़ने का अटूट कार्य किया। उन्होंने गुरुनानक देव के जीवन के अनेक प्रसंग सुनाकर उनके मानवता के प्रति समर्पणभाव की अत्यंत सराहना की। 
समारोह में मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थियों ने रानी लक्ष्मी बाई के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित सम्भाषण, समूह गान, एकल गान, कविताएं आदि सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। विद्यार्थियों ने शबद-कीर्तन, गुरुबाणी, एकल व समूह गीत आदि प्रस्तुत कर गुरुनानक देव के संदेशों का उल्लेख किया। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल, मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण समेत मेवाड़ परिवार का समस्त स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद थे। समारोह का सफल संचालन अमित पाराशर ने किया।   

Tuesday, 25 October 2016

मेवाड़ में ‘आरटीआई’ पर सेमिनार आयोजित

विद्यार्थी जनहित में आरटीआई का अधिक उपयोग करें- शर्मा
वक्ता बोले- समाज से भ्रष्टाचार मिटाने में आरटीआई की अह्म भूमिका   
 मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से ‘आरटीआई’ विषय पर आयोजित सेमिनार में केन्द्रीय सूचना आयोग के रजिस्ट्रार एमके शर्मा ने बताया कि लोग आरटीआई कानून के महत्व को समझें और अपने अधिकारों के लिए इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। विद्यार्थियों को आरटीआई का उपयोग विशेष रूप से करना चाहिए। इससे सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। 
श्री शर्मा ने बताया कि आरटीआई के जरिये किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल की जा सकती है। सभी सरकारी कर्मचारी आरटीआई एक्ट के तहत सही और सटीक जानकारी मुहैया कराने के लिए बाध्य हैं। लेकिन जो सुरक्षा सम्बंधी क्षेत्र हैं, उन्हें इस कानून के दायरे से मुक्त रखा गया है। आरटीआई एक्टीविस्ट राजीव कुमार ने बताया कि आरटीआई लोकतंत्र का एक मूल हिस्सा है। इसका उद्देश्य समाज और सरकारी तंत्र के बीच पारदर्शिता लाना है। इसके जरिये हम समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर सकते हैं। उन्होंने अनेक उदाहरणों के जरिये बताया कि कैसे एक आरटीआई आपको आपके अधिकार दिला सकती है। 
सेमिनार में दोनों वक्ताओं को मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व सेमिनार में छात्र वकार, मधुकर आदि ने आरटीआई विषय पर अपने विचार प्रकट किए। सेमिनार में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण समेत तमाम शिक्षण स्टाफ व भारी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। सेमिनार का सफल संचालन गुरुमहिमा ने किया। 

Wednesday, 19 October 2016

मेवाड़ में ‘वैकल्पिक विवाद समाधान’ विषय पर गेस्ट लेक्चर आयोजित

 देश की अदालतों में लंबित मामलों की 
बढ़ती संख्या पर वकीलों ने जताई चिंता
- विद्यार्थियों को विवाद समाधान के अनेक तरीकों से अवगत कराया                                        

 देश की अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनने लगी है। पीड़ितों को समय से न्याय न मिलने से चिंतित अधिवक्ताओं का सुझाव है कि अदालतों में मामले ले जाने से पहले उनका आपसी सहमति से निबटारा हो जाना चाहिए। वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित गेस्ट लेक्चर में इसी विषय पर दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला और समाज को समय पर न्याय दिलाने की प्रक्रिया का अधिक से अधिक उपयोग करने की बात कही।

वरिष्ठ अधिवक्ता अक्सा एस. फातिमा ने विवाद समाधान के विकल्पों की कानून के विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि वैकल्पिक विवाद समाधान में कुछ ऐसे तरीके हैं, जिंन्हें अपनाकर अदालत में जाए बिना विवादों का समाधान आपसी सहमति से किया जा सकता है। ये तरीके हैं- माध्यस्थम्, मध्यस्थता, मोल-भाव, समझौता आदि। उन्होंने बताया कि इन तरीकों से अनेक लाभ मिलते हैं। जैसे- यह सरल व द्रुतगामी प्रक्रिया है। इसमें गोपनीयता बनी रहती है। यह प्रक्रिया कम खर्चीली होती है। इसमें समयावधि का निर्धारण किया जा सकता है। सुश्री फातिमा के अनुसार खाप पंचायतों के जरिये भी न्याय मिलने में आसानी रहती है। वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ कुमार ने भी वैकल्पिक विवाद समाधान को समाजहित में उचित ठहराया और इसके जरिये जल्द न्याय मिलने की प्रक्रिया को बेहतर करार दिया। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने दोनों अतिथि अधिवक्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेश भारत भूषण, शिक्षण स्टाफ एवं भारी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। संचालन मेघा जुनेजा ने किया। 


Friday, 23 September 2016

मेवाड़ में ’परिचय-2016’ समारोहपूर्वक आयोजित

विद्यार्थियों ने जमकर मचाया धमाल, फैशन शो के जरिये दिये संदेश
समय व उम्र के हिसाब से नया सीखें- डॉ. गदिया

वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के मेवाड़ ऑडिटोरियम में ’परिचय-2016’ नाम से आयोजित नवागंतुक स्वागत समारोह में विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रमों के जरिये जमकर धमाल मचाया। बहुआयामी रंगारंग कार्यक्रम व संदेशपरक फैशन शो समारोह का मुख्य आकर्षण रहा। फैशन शो में दुनिया, देश, समाज की समस्याओं, उनके निराकरण के उपायों एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश प्रचारित किये गये। 
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह एक स्वर्णकाल है। इसे व्यर्थ न जाने दें। समय व उम्र के हिसाब से नया सीखें और अपने भीतर छिपी क्षमताओं को बलवान बनायें। अपने गुणों को ध्यान में रखकर अपना लक्ष्य निर्धारित करें और इसे पाने के लिए ईमानदारी से कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कहा कि कुछ नया सीखना है तो दूसरों का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में मेवाड़ प्रबंधन कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा। मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने अपने स्वागत भाषण में मेवाड़ शिक्षण समूह के नियमों व उद्देश्यों से सभी विद्यार्थियों को अवगत कराया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इससे पूर्व डॉ. गदिया ने निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल समेत मेवाड़ परिवार के सदस्यों के साथ मां शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। समारोह में बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर खूब समां बांधा। यती त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना कर कार्यक्रम को विधिवत शुरुआत दी। हर्ष ने वंदेमातरम् गीत गाकर देशभक्ति का भाव जागृत किया। साक्षी तंवर, अभिषेक अवस्थी व निधि शर्मा ने मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस में अपने अनुभव सबके साथ बांटे। केशव एंड ग्रुप ने बेहतरीन नृत्य प्रदर्शन के जरिये समारोह को नई उड़ान दी। फैशन शो, समूह व एकल नृत्य, मिमिक्री के अलावा विद्यार्थियों ने मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के अनुभव भी आपस में बांटे। संजय, ज्योति, यासर अली, शानू, रितिका, शिल्पा आदि विद्यार्थियों का प्रदर्शन बहुत सराहनीय रहा। समारोह में मेवाड़ का तमाम शिक्षण स्टाफ व विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह का सफल संचालन तुषार बंसल, आरती शुक्ला व आकाश भारद्वाज ने किया।   

मेवाड़ में विद्यार्थियों के लिए लगा मतदाता शिविर

एडीएम ने बच्चों को वोट बनवाने के तरीके बताये
अपर जिलाधिकारी वित्त राजेश यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि अपने मताधिकार के महत्व को समझें और वोट बनवायें। ताकि आप देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा सकें।
श्री यादव मेवाड़ ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिनका वोट नहीं बना है, वे विद्यार्थी वोट जल्द बनवा लें। निर्वाचन आयोग के भी आदेश हैं कि युवा चुनावों में बढ़-चढ़कर भाग ले, ताकि देश को मजबूत करने वाले सही लोगों का चुनाव हो सके। उन्होंने वोट बनवाने के लिए भरे जाने वाले प्रपत्रों की तकनीकी जानकारी भी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने प्रपत्र संख्या छह में क्या-क्या भरा जाएगा, इसका पूरा ब्यौरा विद्यार्थियों को समझाया। उन्होंने बीएलओ की ड्यूटी मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में लगवा दी है, ये विशेष रू

प से विद्यार्थियों के ही वोट बनाएंगे। उन्होंने ये भी बताया कि जिला प्रशासन की ओर से मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस में ऑनलाइन शिविर भी लगाया जाएगा, ताकि वोट बनवाने में विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। इस मौके पर मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने अपर जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया और जिला प्रशासन की मुहिम को सफल बनाने में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिलाया।   

Friday, 9 September 2016

मेवाड़ में ‘टॉक विद् एमेजिंग इंडियंस’ विषय पर नेशनल सेमिनार आयोजित

बेमकसद न जिएं नौजवान विद्यार्थी’
- वक्ताओं ने दीं विद्यार्थियों को जीवन जीने की सही नसीहतें
- पैदा हुए और मर गये की हालत में न जिएं- अरोड़ा
- मुसीबतों से दो-दो हाथ करके ही मिलती है सफलता- डॉ. गदिया
- विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना ही मेवाड़ का मकसद- डॉ. अलका
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस और नई दिल्ली के विश्व युवक केन्द्र की ओर से ‘टॉक विद् एमेजिंग इंडियंस’ विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन मेवाड़ ऑडिटोरियम में किया गया। नोएडा डीफ सोसायटी की संस्थापक रूमा रोका सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि और कानून की पुस्तकों के मशहूर लेखक व जाने-माने अधिवक्ता राकेश अरोड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने सम्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जीवन को बेमकसद न जीने की नसीहतें दीं। अन्य वक्ताओं समेत उन्होंने भी कहा कि जिन्दगी में संघर्ष करके कुछ बनना सीखो। ‘पैदा हुए और मर गये’ वाली स्थिति में जीने वाले लोगों को दुनिया कभी याद नहीं रखती।
मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ सेमिनार की विधिवत शुरुआत हुई। अतिथियों को मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की ओर से बुके व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अपने स्वागत भाषण में मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने संस्थान का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि नौजवान पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए संस्थान निरंतर प्रतिबद्ध है। विभिन्न गतिविधियों के जरिये उनका समुचित विकास करने का प्रयास जारी है और अनवरत जारी रहेगा। अपने विशेष सम्भाषण में मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में कभी हार नहीं मानना। काम से कभी जी नहीं चुराना। ईश्वर परीक्षा लेता है। लेकिन आपमें दृढ़ इच्छाशक्ति है तो कोई भी ताक़त आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। मुसीबतें सबपर आती हैं। मगर जो इनसे दो-दो हाथ कर लेता है, वह आगे बढ़ जाता है।

मशहूर अधिवक्ता अशोक अरोड़ा ने अपनी चुटीली और व्यंग्यपूर्ण भाव भंगिमाओं से गंभीर विषय को बेहतरीन अंदाज में विद्यार्थियों के समक्ष पेश किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन का एक मकसद तय करें और उसके अनुसार काम करें। उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। नोएडा डीफ सोसायटी की संस्थापक रूमा रोका ने एक डॉक्यूमेंट्री के जरिये अपनी बात को विद्यार्थियों तक पहुंचाया और उन्हें जीने की विशिष्ट कला से अवगत कराया। सेमिनार में रजत थॉमस, अजीत राय, उदय शंकर सिंह आदि ने भी अपने सारर्गिर्भत विचारों से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस मौके पर मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थी व शिक्षण स्टाफ के सदस्य मौजूद थे। संचालन अम्बरीन अब्बास ने किया। अंत में शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. तान्या गुप्ता ने सभी अतिथियों को आभार व्यक्त किया।



Wednesday, 10 August 2016

मेवाड़ में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित


180 विद्यार्थियों ने लिया भाग, तीन विजेता घोषित
- विजेताओं को नकद धनराशि से किया गया पुरस्कृत
- समाजसेवी गौरव गर्ग व मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशिका
  डॉ. अलका अग्रवाल ने दिये पुरस्कार

 पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर आधारित निबंध प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी समझ और हुनर का बखूबी इस्तेमाल किया। निबंध प्रतियोगिता के विजेता रहे विद्यार्थियों को विवेकानंद सभागार में नकद धनराशि देकर पुरस्कृत किया गया। समाजसेवी गौरव गर्ग और मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने विजेताओं को पुरस्कार दिये।

गौरव गर्ग ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए अब्दुल कलाम के अनेक संस्मरण और कोटेशन सुनाईं। उन्होंने कहा कि हम देश का कानून तो नहीं बदल सकते, लेकिन सिस्टम को बदलने की ताकत जरूर रखते हैं। आज का नौजवान ही इस सिस्टम से दो-दो हाथ कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के लचर सिस्टम को बदलने के लिए आगे आएं। मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि निबंध प्रतियोगिता का आयोजन करने का मकसद बच्चों को कलाम साहब के बारे में जानकारी देना था। इसी तरह मेवाड़ इंस्टीट्यूट में समय-समय पर महापुरुषों की जयंतियां मनाई जाती हैं ताकि बच्चे इनके बारे में जान सकें। इंस्टीट्यूट का मकसद बच्चों को केवल पाठ्यक्रम से रूबरू कराना ही नहीं है, बल्कि विभिन्न गतिविधियों के जरिये उनका सर्वागींण विकास करना भी है। ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर देश के विकास में अपना समुचित योगदान दे सकें। उन्होंने बच्चों को कहा कि वे शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपनी पढ़ाई जारी रखें और भविष्य में अच्छे नागरिक बनें। शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद कुमार मदैसिया ने बताया कि निबंध प्रतियोगिता का विषय- ‘अब्दुल कलाम को मिसाइलमैन क्यों कहते हैं’ रखा गया था। अंग्रेजी और हिन्दी भाषा में शिक्षा विभाग के कुल 180 विद्यार्थियों ने निबंध लिखे। इनमें मानसी भूषण को प्रथम, सरवेन्द्र सिंह को द्वितीय और नेहा राघव को तृतीय घोषित किया गया। मानसी को 3100, सरवेन्द्र को 2100 और नेहा को 1100 रुपये की नकद राशि पुरस्कार में दी गई। इसके अलावा स्मृति झा, राकेश ओझा, पूनम त्रिपाठी व बबीता को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना गया। इन्हें इंस्टीट्यूट की ओर से प्रमाण पत्र दिये जाएंगे। पुरस्कार समारोह का सफल संचालन प्रोफेसर प्रमोद कुमार मदैसिया ने किया। इस मौके पर मेवाड़ इंस्टीट्यूट का शिक्षण-गैर शिक्षण स्टाफ व विद्यार्थी काफी संख्या में मौजूद था। 


Monday, 8 August 2016

मेवाड़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैेनेजमेन्ट में शुरू हुआ बी.कॉम का डिग्री कोर्स

बी.कॉम करने के लिए नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली
- चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने 60 सीटों की मान्यता दी
बी.कॉम करने के लिए हिन्डनपार क्षेत्र के बच्चों खासतौर से लड़कियों को अब दिल्ली और गाजियाबाद की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने वसुंधरा सेक्टर 4सी स्थित मेवाड़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैेनेजमेन्ट को अब बी.कॉम का डिग्री कोर्स कराने की मान्यता प्रदान कर दी है। इससे यहां के बच्चों का दिल्ली जाना तो बचेगा ही, खर्चे पर भी लगाम लगेगी।

मेवाड़ इंस्टीट्यूट के महासचिव अशोक कुमार सिंघल ने बताया कि मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने बी.कॉम की 60 सीटें मेवाड़ इंस्टीट्यूट को दी हैं। इसके कुल 6 सेमेस्टर होंगे। बी.कॉम पाठ्यक्रम के लिए कुशल शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। श्री सिंघल ने बताया कि अभी तक वसुंधरा, वैशाली, इंदिरापुरम, व कौशाम्बी के अलावा कनावनी, मकनपुर, साहिबाबाद गांव, ब्रज विहार, सूर्यनगर, रामप्रस्थ, मोहन नगर, अर्थला, करहैड़ा आदि के बच्चों खासतौर से लड़कियों कोे निजी या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बी.कॉम करने के लिए दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी। दाखिलों के लिए दिल्ली के कॉलेजों का मुंह ताकना पड़ता था। यहां के बच्चों की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए मेवाड़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैेनेजमेन्ट ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से बॉ.कॉम के डिग्री कोर्स की मान्यता ली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मेवाड़ इंस्टीट्यूट में बी.कॉम की पढ़ाई शुरू होने से यहां के बच्चों को काफी लाभ मिलेगा। 

Monday, 25 July 2016

मेवाड़ में बीएड के विद्यार्थियोें का ओरियंटेशन कार्यक्रम आयोजित

धारा के विपरीत चलने वालों को पूजता है समाज- डॉ. अलका
-नवागंतुक विद्यार्थियों को दीं अनेक उपयोगी जानकारियां

 धारा के विपरीत चलने वाले लोग हमेशा समाज में पूजे जाते हैं। इसलिए धारा के विपरीत चलने की चुनौती स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिये। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के ऑडिटोरियम में आयोजित ऑरियंटेशन कार्यक्रम में इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने नवागंतुक बीएड बैच 2016-18 के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा कि और कॉलेजों की तरह फीस और हाजिरी में छूट न देकर शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने में 
मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस का नाम पूरे एनसीआर

में सबसे आगे है। उनके यहां विद्यार्थियों ने दाखिले लेकर साबित कर दिया है कि वे गुणवत्तायुक्त शिक्षा पाने के अलावा समाज की मुख्यधारा से जोड़ने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके करियर व बीएड करने के फैसले पर अनेक सवाल-जवाब किये। डॉ. अलका  ने कहा कि अपनी मर्जी से बीएड कर समाज में नई पीढ़़ी को संस्कारित करने की जिम्मेदारी नौजवानों की है। युवा पीढ़ी को शिक्षित और सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना की गतिविधियों में दीक्षित करने का दायित्व मेवाड़ बखूबी निभाता रहा है और आगे भी निभाएगा। 
मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस और शिक्षण संस्थानों से अलग है। यहां भिन्न शिक्षण पद्धति के अलावा अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक व देशभक्तिपूर्ण गतिविधियों से विद्यार्थियों को रूबरू कराया जाता है। उनका यह मिशन निरंतर जारी रहेगा। ऑरियंटेशन कार्यक्रम में मेवाड़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में शिक्षा विभाग के प्रभारी प्रमोद मदैसिया ने मेवाड़ से बीएड करने के फायदे बताये तो डॉ. तान्या गुप्ता ने कोर्स की विविधता की व्यापकता पर प्रकाश डाला। अमित कुमार ने हाजिरी व नियम के बारे में जानकारी दी। बबीता सिंह ने प्लेसमेंट व कैम्पस इंटरव्यू के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया तो डॉ. गीता रानी शर्मा ने शिक्षा, मेवाड़ की सांस्कृतिक गतिविधियों व आपसी सहयोग की भावना को अपने सम्भाषण में इंगित किया। हिमानी रायजादा व मानवी त्यागी ने कॉलेज में अनुशासन बनाये रखने की हिदायतें दीं।   

Tuesday, 21 June 2016

मेवाड़ में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

योग के जरिये बताये स्वस्थ रहने के उपाय
परीक्षा की तैयारी करने के लिये उपयोगी योग की दी जानकारी
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर  शिक्षण स्टाफ ने योगासन व प्राणायाम कर आजीवन स्वस्थ रहने का संकल्प लिया।

योग प्रशिक्षक प्रोफेसर आईएम पांडेय ने सभी को आसन व प्राणायाम करने की विभिन्न उपयोगी विधियों से रूबरू कराया।
योग दिवस कार्यक्रम की शुरुआत मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल के निर्देश पर हुई। शिक्षक-शिक्षिकाओं को कपाल भाति, भ्रामरी प्राणायाम के अलावा श्वांस के आरोह-अवरोह की सटीक जानकारी दी। उन्हें स्वस्थ रहने के अतिरिक्त कठिन परीक्षा की तैयारी करने के टिप्स भी दिये। साथ ही आसन, प्राणयाम व अष्टांग की विधियों के जरिये मन को शांत रखने और बुद्धि व शरीर को बलिष्ठ करने के उपाय भी बताये। 

Thursday, 26 May 2016

मेवाड़ में ‘वेदों में विज्ञान’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित

योग में ओउ्म के उच्चारण पर विवाद करना बेमानी- डॉ. शर्मा
- ओउ्म ध्यान लगाने और एकाग्रता पाने की महत्वूपर्ण तकनीक है
- हमें साजिशन हमारी शिक्षा नीति से दूर किया गया- डॉ. गदिया

 गवर्नमेंट पीजी कॉलेज नोएडा के प्रोफेसर डॉ. वाई.डी. शर्मा ने कहा कि योग में ओउ्म शब्द के उच्चारण पर विवाद खड़ा करना बेमानी है। चित्त की वृत्तियों को रोकने के लिए योग बना है और योग में वृत्तियों को दूर करने के लिए जिस ध्यान की आवश्यकता होती है, वह ओउ्म से ही संभव है। योग हमारे चित्त को शांति प्रदान कर एकाग्र करता है। ओउ्म किसी धर्म का पर्याय नहीं बल्कि हमारी अंतश्चेतना की महत्वूपर्ण तकनीक है। वसुंधरा सेक्टर 4सी स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में आयोजित मासिक विचार संगोष्ठी में उन्होंने ये विचार व्यक्त किये। ‘वेदों में विज्ञान’ विषय पर वह मेवाड़ परिवार के सदस्यों व विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। 
उन्होंने बताया कि 18वीं शताब्दी के बाद संस्कृत को केवल एक विशेष समुदाय ने भोजन पाने का जरिया बनाया। इसके बाद विदेशियों ने खासतौर पर जर्मनी ने इसे गोद लिया। आज संस्कृत पर शोधपरक जितने भी भाष्य हमें मिलते हैं, सब विदेशी हैं। हम अपनी ज्ञान सम्पदा को खोने लगे हैं। इसका फायदा विदेशियों ने उठाया। आपको जानकर हैरत होगी कि 16 देशों के 34 विश्वविद्यालयों में आज संस्कृत मुख्य विषय के रूप में पढ़ाई जाती है। हमें हमारे ही मूल ज्ञान से साजिशन दूर कर दिया गया है। हम इसके सत्य को पहचानें, इसीलिए भारत सरकार ने शिक्षण संस्थानों में संस्कृत को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी ही विद्याओं को चुराकर इन्हें हमपर थोपा जा रहा है। इसे जानना व पहचानना जरूरी है। उन्होंने अपने सम्बोधन के बाद लोगों के प्रश्नों के उत्त्र भी बड़ी सहजता से दिये।
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि हिन्दुस्तान पर राज करने वालों ने साजिशन हमें हमारी शिक्षा नीति से दूर किया और अपनी शिक्षा नीति में ढाला। हमारे संस्कार, हमारे विचार, हमारी संस्कृति व सभ्यता को छिन्न-भिन्न किया। अगर इतिहास पर नजर दौड़ायें तो पाएंगे कि विदेशों में अब जो अन्वेषण हो रहे हैं, वे हम कब के कर चुके हैं। हर क्षेत्र में हम आगे रहे हैं। इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट आदि में हमारा कोई सानी नहीं है। जो बात विदेशी 100 पेजों में लिखकर स्पष्ट कर पाते हैं, वह हमारे संस्कृत के एक श्लोक में निहित है। उन्होंने कहा कि अपने मूल को पहचानना है तो संस्कृत से जुड़ना होगा। नीति श्लोक पढ़कर विद्यार्थी अपने आपको सबसे अलग और महत्वूपर्ण बना सकते हैं। इसलिए वे जागें और संस्कृत को रोजगार के अलावा शौक के तौर पर भी पढ़ें।  
इससे पूर्व उन्होंने प्रोफेसर डॉ. शर्मा को संस्थान की ओर से शॉल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण, मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल समेत मेवाड़ परिवार के सदस्य व विद्यार्थी मौजूद थे। संगोष्ठी का सफल संचालन प्रोफेसर आईएम पांडेय ने किया।