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Friday, 2 December 2016

मेवाड़ में संविधान दिवस समारोहपूर्वक आयोजित

सभी न्यायाधीश अपनी सीमा न लांघें- संगल
सफल वकील बनने के बाद करना गरीब वादकारियों की मदद 
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के दयानंद सभागार में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित संविधान दिवस समारोह में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश योगेन्द्र कुमार संगल ने केन्द्रीय वित मंत्री अरुण जेटली की बात को बढ़ाते हुए आग्रह किया कि सभी न्यायाधीश अपनी सीमा को पार न करते हुए काम करें। जब भी कार्यपालिका जनता के अधिकारों का उल्लंघन करती है, तभी ये मामले न्यायपालिका तक पहुंचते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम कर श्रेष्ठ वकील बनने की नसीहत दी। 
अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह किसी की सज़ा में संशोधन कर सकते हैं लेकिन अफसोस यह काम अब अदालतें अपने बूते करने लगी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सीमा से बाहर आकर कई मामलों में न्याय देने का काम किया है। इसे ज्यूडिशियल एक्टीविज्म कहते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी मन लगाकर कठिन परिश्रम करें। आगे बढ़ें। भगवान आपके साथ है। सफलता जरूर मिलेगी। 
समारोह में कानून की पढ़ाई कर रहे वकार, राहुल सहगल, रेनू, आरुषि, रूबी, पूजा गर्ग आदि ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त कर सबका मन मोहा। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने मुख्य अतिथि योगेन्द्र कुमार संगल को स्मृति चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया। अंत में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के अपर महानिदेशक एके गौतम ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थी समय-समय पर मुफ्त कानूनी शिविर का आयोजन करते हैं। तिहाड़ जेल में बराबर शिविर लगाकर कैदियों को न्याय दिलाने की मुहिम चलायी जा रही है। संचालन गुरुमहिमा ने किया। इस अवसर पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण समेत लॉ इंस्टीट्यूट का शिक्षण स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद थे। 

Tuesday, 25 October 2016

मेवाड़ में ‘आरटीआई’ पर सेमिनार आयोजित

विद्यार्थी जनहित में आरटीआई का अधिक उपयोग करें- शर्मा
वक्ता बोले- समाज से भ्रष्टाचार मिटाने में आरटीआई की अह्म भूमिका   
 मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से ‘आरटीआई’ विषय पर आयोजित सेमिनार में केन्द्रीय सूचना आयोग के रजिस्ट्रार एमके शर्मा ने बताया कि लोग आरटीआई कानून के महत्व को समझें और अपने अधिकारों के लिए इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। विद्यार्थियों को आरटीआई का उपयोग विशेष रूप से करना चाहिए। इससे सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। 
श्री शर्मा ने बताया कि आरटीआई के जरिये किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल की जा सकती है। सभी सरकारी कर्मचारी आरटीआई एक्ट के तहत सही और सटीक जानकारी मुहैया कराने के लिए बाध्य हैं। लेकिन जो सुरक्षा सम्बंधी क्षेत्र हैं, उन्हें इस कानून के दायरे से मुक्त रखा गया है। आरटीआई एक्टीविस्ट राजीव कुमार ने बताया कि आरटीआई लोकतंत्र का एक मूल हिस्सा है। इसका उद्देश्य समाज और सरकारी तंत्र के बीच पारदर्शिता लाना है। इसके जरिये हम समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर सकते हैं। उन्होंने अनेक उदाहरणों के जरिये बताया कि कैसे एक आरटीआई आपको आपके अधिकार दिला सकती है। 
सेमिनार में दोनों वक्ताओं को मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व सेमिनार में छात्र वकार, मधुकर आदि ने आरटीआई विषय पर अपने विचार प्रकट किए। सेमिनार में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण समेत तमाम शिक्षण स्टाफ व भारी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। सेमिनार का सफल संचालन गुरुमहिमा ने किया। 

Friday, 14 October 2016

मेवाड़ के 150 विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट की अदालतों में लिया कानूनी प्रशिक्षण

छह दिन चली प्रशिक्षण प्रक्रिया
अदालतों का अनुशासन व मुकदमों की पैरवी करना व दलीलें देना सीखा  

वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के 150 बच्चों ने दिल्ली हाईकोर्ट की विभिन्न अदालतों में कानूनी दांव-पेंच सीखे। दिल्ली के नामी वकीलों के संरक्षण में उन्हें ट्रेनिंग देने का बीड़ा मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने उठाया। 
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि 150 बच्चे कानूनी प्रशिक्षण के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के अलावा वहां की विभिन्न अदालतों में गए। कोर्ट के नामी वकीलों के चैम्बर में बैठे। वकीलों के साथ कोर्ट के भीतर गए और अदालतों में कैसे केस चलाए जाते हैं, कैसे पक्ष-प्रतिपक्ष के वकील आपस में किसी केस पर बहस-मुबाहसा करते हैं, कैसे तथ्य जुटाए और पेश किए जाते हैं, इन सबकी जानकारी हासिल की। इसके अलावा कोर्ट के भीतर क्या अनुशासन होता है, कैसे और कहां खड़े होना चाहिए, इसका प्रशिक्षण भी छात्रों को मिला। डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था हर साल करता है। उनके छात्र समाज व देश के लिए बेहतर काम करके दिखाएं, यही उनकी कोशिशें रहती हैं।  

Friday, 11 December 2015

मेवाड़ में मानवाधिकार दिवस समारोह आयोजित

‘सभी धर्मों का आदर कर देश को बनाएं मजबूत’
- धर्म निरपेक्षता पर हुई मॉक मीडिया प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उछाले अनेक मुद्दे
- मानवाधिकारों के प्रति लोग जागरूक नहीं- डॉ. भाखरी
- लोग जागरूक होते तो नहीं बढ़ती हिंसा- कौशिक
- कर्णधारों से पहले अपनी सोच को बड़ा बनाएं- डॉ. गदिया
- मानव अधिकार नहीं मानव कर्तव्य दिवस मनाएं- डॉ. अलका

वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से विवेकानंद सभागार में आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह में ‘धर्म निरपेक्षता’ पर हुई मॉक मीडिया प्रतियोगिता में शामिल होकर विद्यार्थियों ने अपने तर्क-वितर्कों से खूब समां बांधा। प्रतियोगिता में विभिन्न किरदारों का अभिनय कर विद्यार्थियों ने गुजरात दंगा, कश्मीर विवाद, 1984 का सिक्ख दंगा जैसे मुद्दों पर वार्ता की और अंत में सुझाव दिया कि देश से बढ़कर और कुछ नहीं होता है। इसलिए सभी धर्मों का आदर करते हुए देश को मजबूत बनाने की हर किसी वर्ग को पहल करनी होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संयुक्त निदेशक डॉक्टर सविता भाखरी ने समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। अपने सम्बोधन में उन्होंने चिंता व्यक्त की कि मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर देश के लोग अभी जागरूक नहीं हैं। इसका मुख्य कारण है मानवाधिकारों की लोगों को सही जानकारी न होना। उन्होंने बताया कि उनका आयोग लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किये हुए है। 
उन्होंने बताया कि वर्ष 1993 में आयोग का गठन हुआ था। तब से अब तक कुल नौ करोड़, एक लाख 90 हजार मामले आयोग ने सुने और निबटाये हैं। 496 शिकायतें इस वर्ष मिलीं। इनमें से 363 शिकायतों की निगरानी की जा रही है। अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के मामलों को लेकर आयोग गंभीर है। 28 जिलों को निगरानी में लिया हुआ है। विशिष्ट अतिथि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आरपी कौशिक ने कहा कि अगर आयोग गंभीर है तो देश में बढ़ती हिंसा को रोकना होगा। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने मानव अधिकारों व इनके उल्लंघन के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के कर्णधारों की सोच को बड़ा करने के लिए हमें अपनी सोच को पहले बड़ा बनाना होगा। हमें गली-मोहल्लों के विवादों से निकलकर विश्वस्तरीय मुद्दों को हल करने की पहल करनी होगी। तभी अपना देश विकास की राह पर चलेगा। असमानता का भाव मिटाना होगा। अगर 20 प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत लोगों के हकों को मारने पर तुले रहे तो हम पाषाण युग की ओर धकेल दिये जाएंगे। सहिष्णुता जैसे मुद्दे को गंभीरता से सोचना होगा। इस मौके पर उन्होंने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि को मेवाड़ की ओर से स्मृति चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया। 
समारोह में लॉ की छात्रा जयादेवी व रोज़ा शमीम ने मानवाधिकार के महत्व पर सम्भाषण दिया। अंत में मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉक्टर अलका अग्रवाल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम मानवाधिकार दिवस से पहले मानव कर्तव्य दिवस मनाना सीखें। जब हम अपने कर्तव्यों को लेकर सजग होंगे तभी अपने अधिकारों को लेकर गंभीर हो सकेंगे। समारोह में मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण, अपर महानिदेशक एके गौतम समेत लॉ इंस्टीट्यूट का शिक्षण स्टाफ व भारी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे। संचालन अर्शिया ने किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। 

Thursday, 26 November 2015

मेवाड़ में संविधान दिवस समारोहपूर्वक आयोजित

मॉक पार्लियामेंट में ज्वलंत विषयों पर विद्यार्थियों ने की चर्चा
‘सफल वकील बनने के बाद करना गरीब वादकारियों की मदद’
 वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के दयानंद सभागार में आयोजित संविधान दिवस समारोह में मॉक पार्लियामेंट प्रस्तुत कर विद्यार्थियों ने सबको हैरत में डाल दिया। ज्वलंत विषयों जैसे असहिष्णुता, महिला सशक्तिकरण बिल, दहेज एक्ट, धारा 370 आदि पर तकरीरें पेश कर उन्होंने साबित कर दिखाया कि वे भी देश व समाज के प्रति जागरूक हैं और हर विषय पर संजीदा भी। मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित समारोह में सुप्रीम कोर्ट की प्रख्यात अधिवक्ता रेखा अग्रवाल विद्यार्थियों के प्रस्तुतिकरण से अभिभूत हुईं और उन्होंने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम कर श्रेष्ठ वकील बनने की नसीहत दी। 
अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के अधिकारों की बात तो करते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि हमारे घर में पिता, पति और बेटा भी रहते हैं। उनके अधिकारों की बात कौन करेगा। हमें समाज में बराबरी के हक पर चर्चा करनी चाहिये। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि ट्रायल के नाम पर मीडिया जज की भूमिका निभा रहा है, इससे सही न्याय मिलने में दिक्कतें आने लगी हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी मन लगाकर कठिन परिश्रम करें। आगे बढ़ें। भगवान आपके साथ है। सफलता जरूर मिलेगी। मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस बच्चों को करोड़पति व अरबपति बनने के लिए वकील नहीं बना रहा, बल्कि बच्चे वकील बनकर गरीब तबके के लोगों को न्याय दिलाएं, मेवाड़ का यही एक मिशन और विजन है। देश में आज भी लोगों को सुरक्षा व न्याय देना सबसे बड़ी चुनौती है। अदालतों में लाखों रुपये देकर न्याय हासिल किये जा रहे हैं, ऐसे में किसी गरीब को कैसे न्याय मिल सकता है। उसके पास तो वकील की फीस देने तक को पैसे नहीं होते। देश की अदालतों में आज दो करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित पड़े हैं। लोगों को न्याय मिलने की आस टूट रही है। जजों के पास मुकदमों को सुनने व उनपर फैसला करने का लोड दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा है। ऐसे में देश को सही दिशा देना व उसका विकास करने की सोचना बहुत बड़ी चुनौती है। 
समारोह में कानून की पढ़ाई कर रहे वकार, साशा जैन, सतेन्द्र, राहुल सहगल, कार्णिका, प्रभाष व कनिष्क ने विभिन्न विषयों पर सम्भाषण देकर सबका मन मोहा। चेयरमैन डॉ. गदिया ने मुख्य अतिथि रेखा अग्रवाल को स्मृति चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया। अंत में इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थी समय-समय पर मुफ्त कानूनी शिविर का आयोजन करते हैं। तिहाड़ जेल में बराबर शिविर लगाकर कैदियों को न्याय दिलाने की मुहिम चलायी जा रही है। संचालन हिना शर्मा ने किया। इस अवसर पर मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण समेत लॉ इंस्टीट्यूट का शिक्षण स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद थे। 

Saturday, 17 October 2015

मेवाड़ में ‘बौद्धिक सम्पदा अधिकार व विश्व बौद्धिक अधिकार’ पर गेस्ट लेक्चर आयोजित

अब भारत बाल मिठाई का भी जल्द पेटेंट करवा ले- भारद्वाज
बाल मिठाई का भी भारत को पेटेंट करवा लेना चाहिये। क्योंकि यह केवल पहाड़ों में ही पाई जाती है और इसे दुर्लभ मिठाई माना जाता है। यह हमारी बौद्धिक सम्पदा अधिकार के तहत आती है। यह बात आरटीआई एक्टीविस्ट व आईईसी और सीईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में लीगल मैनेजर मुकेश भारद्वाज ने विद्यार्थियों को बताई। वह वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में ‘बौद्धिक सम्पदा अधिकार व विश्व बौद्धिक अधिकार’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। गेस्ट लेक्चर वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित किया गया।
श्री भारद्वाज ने विद्यार्थियों को कॉपीराइट, ट्रेड मार्क, पेटेंट, सर्विस मार्क, भौगोलिक संकेत, इंटीग्रेटेड लेआउट सर्किट डिजाइन, इंडस्ट्रियल डिजाइन के बारे में भी बताया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का पूर्व में कैसे हनन हुआ। उन्हें कैसे चुराकर अपने नाम से और देशों ने पेटेंट करवा लिया। उन्होंने आगाह किया कि किसान जो भी उत्पाद अपग्रेड कर रहे हैं विश्व बाजार में उनका भी भारत समय रहते पेटेंट करवा ले। वरना ये उत्पाद भी अपने हाथ से निकल सकते हैं। इससे पूर्व मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने मुख्य अतिथि मुकेश भारद्वाज को शॉल व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण ने सभी का आभार व्यक्त किया। करीब दो घंटे चले गेस्ट लेक्चर के दौरान विद्यार्थियों ने मुकेश भारद्वाज से अनेक सवाल भी किये। जिनके उन्होंने समुचित जवाब देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासा शांत की।  

Monday, 5 October 2015

मेवाड़ के 200 विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट की अदालतों में लिया कानूनी प्रशिक्षण

- नौ दिन चली प्रशिक्षण प्रक्रिया
-अदालतों का अनुशासन व मुकदमों की पैरवी करना व दलीलें देना सीखा 

वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के 200 बच्चों ने दिल्ली हाईकोर्ट की विभिन्न अदालतों में कानूनी दांव-पेंच सीखे। दिल्ली के नामी वकीलों के संरक्षण में उन्हें ट्रेनिंग देने का बीड़ा मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने उठाया।
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि 200 बच्चे कानूनी प्रशिक्षण के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के अलावा वहां की विभिन्न अदालतों में गए। कोर्ट के नामी वकीलों के चैम्बर में बैठे। वकीलों के साथ कोर्ट के भीतर गए और अदालतों में कैसे केस चलाए जाते हैं, कैसे पक्ष-प्रतिपक्ष के वकील आपस में किसी केस पर बहस-मुबाहसा करते हैं, कैसे तथ्य जुटाए और पेश किए जाते हैं, इन सबकी जानकारी हासिल की। इसके अलावा कोर्ट के भीतर क्या अनुशासन होता है, कैसे और कहां खड़े होना चाहिए, इसका प्रशिक्षण भी छात्रों को मिला। डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था हर साल करता है। उनके छात्र समाज व देश के लिए बेहतर काम करके दिखाएं, यही उनकी कोशिशें रहती हैं।  

Thursday, 10 September 2015

मेवाड़ में विधिशास्त्र की उपयोगिता पर अतिथि व्याख्यान आयोजित

विधिशास्त्र के अध्ययन बिना वकील बनना ऐसा है जैसे बिना जुराबों के जूते पहनना। अगर अच्छा वकील बनना है तो विधिशास्त्र में महारथ हासिल करनी ही होगी। तीस हजारी कोर्ट दिल्ली के मशहूर वकील प्रतीक चतुर्वेदी ने मेवाड़ लाॅ इंस्टीट्यूट के विवेकानंद सभागार में विधि के विद्यार्थियों को यह जानकारी दी। ’कानूनी पेशे में विधिशास्त्र की उपयोगिता’ विषय पर श्री चतुर्वेदी बोल रहे थे। 
अपने विशेष अतिथि व्याख्यान में श्री चतुर्वेदी ने बताया कि विधि के क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक व्यक्ति का भाषा के साथ विषय पर भी नियंत्रण होना चाहिये। कोई भी व्यक्ति जो विधि व्यवसाय में है, एक सफल अधिवक्ता या न्यायधीश तभी हो सकता है, जब वह विधिशास्त्र का अधिकतम ज्ञान रखता हो। विधिशास्त्र का वास्तविक अर्थ सामान्य सारांश का अन्वेषण है। इसमें अनेक कानूनी बातों को विस्तार से बताया गया है। जैसे- विधि विषय का आधार क्या है। इसका अध्ययन इस
विषय की सैद्धांतिक प्रकृति को भी सम्मिलित करता है। उन्होंने बताया कि विषय का आधार, आधार का नियम, इसके सिद्धांतों का उद्देश्य, अध्ययन का दर्शन, तार्किकता की समझ, आधारभूत ज्ञान आदि भी विधिशास्त्र ही बताता है। उन्हांेने बताया कि अगर विद्यार्थी विधि क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले इसकी मूल अवधारणा को जानता है तो वह निश्चित रूप से सफल होगा। प्रतीक चतुर्वेदी ने अपने व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर भी दिये। इस अवसर पर मेवाड़ लाॅ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण ने प्रतीक चतुर्वेदी को शाॅल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। अतिथि व्याख्यान में भारत भूषण के अतिरिक्त इंस्टीट्यूट के अपर महानिदेशक एके गौतम, उपनिदेशक जेएन जमवाल आदि भी मौजूद थे।

Wednesday, 5 August 2015

मेवाड़ में वकील बने विद्यार्थियों का विदाई समारोह आयोजित

मेवाड़ का हर विद्यार्थी है हमारा ब्रांड अम्बेसडर- डॉ. गदिया
विदा ले रहे विद्यार्थियों ने भावुक संस्मरण सुनाकर सबकी आंखें नम कर दीं


सभी विद्यार्थी हमारे ब्रांड अम्बेसडर हैं। इसलिए समाज व अपने प्रोफेशन में ईमानदारी व मेहनत के साथ काम करना और असहाय व गरीबों को न्याय दिलाने में कोताही मत बरतना। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने ये बातें विधि संस्थान के विद्यार्थियों को कहीं। विवेकानंद सभागार में आयोजित एलएलबी पंचवर्षीय विद्यार्थियों के विदाई समारोह को वह सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने विद्यार्थियों को कुल 12 सबक याद दिलाये। इनमें उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अब समाज व देश की सेवा करने जा रहे हैं। इसलिए वे हमेशा लोगों के साथ उदार व मधुर व्यवहार बनाकर रखें। बड़ों का सम्मान करें। कोर्ट रूम में अपने सीनियर वकील, महिलाओं व बुजुर्गों को पहले सीट दें। कभी किसी जज या सीनियर वकील की बुराई किसी से न करें। कड़वाहट को खुद पीना सीखें। अपने क्लाइंट के लिए ईमानदार व वफादार बनकर रहें। काम की गुणवत्ता में फीस के हिसाब से कमी न लायें। लॉ ऑफ लिमिटेशन का ध्यान रखें। एक केस को दस बार पढ़कर सुंदर व तथ्यात्मक वाक्यों का प्रस्तुतिकरण कोर्ट में दें। हमेशा अपने समाज, देश, अभिभावक, शिक्षक व शिक्षण संस्थान को याद रखें। इसके अलावा उन्होंने कहा कि तीन बातें हमेशा विद्याार्थियों के काम आएंगीं- अच्छी सेहत, अच्छे सम्पर्क व सामाजिकता और सामान्य मगर जरूरी जानकारी। उन्होंने मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस से विदा ले रहे विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और काबिल व कामयाब वकील बनने की नसीहत दी। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने विद्यार्थियों से कहा कि हमेशा अपने सीनियर्स को अपना पूज्यनीय मानना। मेवाड़ में जो कुछ संस्कार ग्रहण किये हैं, उनका व्यवहारिक रूप से पालन करना। मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण ने भी विधि विद्यार्थियों को सम्बोधित किया और उन्हें करियर बनाने के कई महत्वूपर्ण टिप्स दिये। संचालन शिप्रा मल्होत्रा ने किया। समारोह में विद्यार्थियों ने मेवाड़ में बिताये पलों को याद किया और कुछ भावुक संस्मरण भी सुनाकर सबकी आंखें नम कर दीं।


Tuesday, 28 July 2015

मेवाड़ में घरेलू हिंसा पर गेस्ट लेक्चर आयोजित

वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित गेस्ट लेक्चर में सुप्रीम कोर्ट की सुप्रसिद्ध अधिवक्ता सीमा गुलाटी ने घरेलू हिंसा की कानूनी पेचीदगियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा के काूनन की जानकारी अधिकतर लोगों को नहीं है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। 
सुश्री गुलाटी ने बताया कि घरेलू हिंसा के मामले में तीन तरह के लोग हैं। एक, जिन्हें घरेलू हिंसा काूनन की जानकारी नहीं है। दूसरे, कुछ लोग जानते हैं और तीसरे वे लोग जिन्हें कानून की जानकारी तो है मगर वे इसे अमल में नहीं लाते। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी घरेलू हिंसा की धारा 498ए, 304ई, सेक्शन 12 व सेक्शन 31 की पूरी जानकारी रखें और लोगों को इसके प्रति जागरूक करें। गेस्ट लेक्चर के दौरान विद्यार्थियों ने उनसे सवाल-जवाब भी किये। जिनका सीमा गुलाटी ने बखूबी जवाब दिया। मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के अपर विधि निदेशक प्रोफेसर एके गौतम ने कहा कि केवल कानून की धारा 12 ही नहीं 17, 18 व 19 भी घरेलू हिंसा के मामले में काफी कारगर है। इसके तहत पीड़ित पुरुष या महिला बराबर न्याय पाने के हकदार हैं। श्री गौतम व सहायक निदेशक जेएन जमवाल ने सीमा गुलाटी को इंस्टीट्यूट की ओर से शॉल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 

Monday, 6 July 2015

असहायों को न्याय दिलाना पहली प्राथमिकता - डॉ. गदिया

मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों का विदाई समारोह आयोजित
विदाई समारोह में छात्र-छात्राओं ने बांटे अनुभव
आप समाज के बीच जा रहे हैं। अब कोई माफ नहीं करेगा। इसलिए हर काम को करने में गंभीरता बरतना। जागरूक रहना। सफलता जरूर मिलेगी। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने विधि विभाग के तृतीय वर्ष के छात्रों के विदाई समारोह में बतौर मुख्य अतिथि ये बातें कहीं।
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में आयोजित विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि जिंदगी में घोड़े की तरह काम करना और लोगों से साधु की तरह व्यवहार करना। आज अदालतों में न्याय पाना बहुत महंगा हो गया है। गरीबों और मजलूमों के लिए न्याय पाना तो दूर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में मुकदमा लड़ना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट से विदा ले रहे छात्रों को नसीहत दी कि इन गरीब व मजलूमों के हकों की लड़ाई के लिए सदैव तत्पर रहना। कम फीस लेकर भी अधिक मेहनत कर न्याय दिलाना। उन्होंने कहा कि विनम्र व ईमानदार रहकर स्वयं काम करने की आदत डालना। खुद मुकदमा लड़ना सीखना। अदालतों के दलाल मत बनना। बैसाखी के सहारे आप बड़े अच्छे वकील नहीं बन सकोगे। खुद तैयारी करना, मेहनत करना, सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने कहा कि मेवाड़ से जो कुछ भी छात्रों ने सीखा, उसका इस्तेमाल जरूर करना। ये बातें उनकी जिंदगी में बहुत काम आएंगीं। मेवाड़ लॉ इंस्टीट्यूट के अपर विधि निदेशक एके गौतम ने कहा कि सीनियर छात्र जूनियर छात्रों का रोल मॉडल बनें। मेवाड़ से जाने के बाद आते रहें। जूनियर्स को अपने अनुभवों का लाभ दें। उन्हें प्रेरित कर समाज व देश की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करते रहें।
समारोह में सीनियर छात्रों ने अपने अनुभव बताए। उन्होंने मेवाड़ में शिक्षा पाने को जीवन का स्वर्णिम अवसर बताया। बताया कि मेवाड़ समाज व देश को वकील नहीं एक आदर्श वकील देने का बीड़ा उठाए हुए है। हम एडवोकेट नहीं आदर्श एडवोकेट बनकर जा रहे हैं।